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मिडिल क्लास को वोट के बदले क्या मिला? कहां हैं अच्छे दिन?

दोस्तों, हर कोई यही कह रहा है की modi sarkar में महंगाई बहुत बढ़ गई है। आज चाहे वो आम आदमी हो या बिजनेसमैन modi sarkar में सभी महंगाई का रोना रो रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की इस modi sarkar में सबसे खराब स्थिति किसकी है?

तो, इसका जवाब है मिडिल क्लास या मध्यम वर्ग। जी हां, modi sarkar में सबसे अधिक महंगाई की मार कोई झेल रहा है तो वो है मध्यम वर्ग। आइए अब जानने की कोशिश करते हैं हम इन बातों को किस आधार पर कह रहे हैं।

जैसा की आप सभी जानते हैं की मोदी जी ने सपनों का सौदागर बन देशवासियों को अच्छे दिन के सपने दिखाए जिसके परिणाम स्वरूप केंद्र में पूर्ण बहुमत की modi sarkar सरकार बनी। 

modi sarkar में अच्छे दिन के जैसे बड़े बड़े सपने दिखाए गए थे उसके बाद नई modi sarkar से हर देशवासी की तरह मिडिल क्लास को भी अपने सपने पूरे होने की एक आस बंध गई थी की उसकी जिंदगी में भी जरूर कुछ बदलाव आयेगा, जरूर उसके भी अच्छे दिन आयेंगे। 

लेकिन हुआ बिल्कुल इसका उल्टा, सपनों के सौदागर ने बड़े बड़े सपने दिखाकर सत्ता तो हासिल कर ली लेकिन सत्ता मिलते ही महंगाई की चक्की में सबसे ज्यादा मिडिल क्लास को ही पीसकर रख दिया। 

अब यहां यह सवाल उठता है की महंगाई तो सबके लिए बढ़ी है तो सिर्फ मिडिल क्लास को ही कैसे कह सकते हैं? तो, आइए अब इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

इसका जवाब ये है की modi sarkar में समाज के अन्य वर्गों में से दुकानदारों, व्यापारियों और बिजनेस करने वालों ने तो वास्तव में जितनी महंगाई बढ़ी उससे कहीं ज्यादा महंगा अपना सामान बेचना शुरू कर दिया, तो उनको महंगाई से क्या फर्क पड़ा? उन्होंने तो महंगाई बढ़ने के बहाने मौके का फायदा उठाते हुए लोगों ने दुगुना तिगुना वसूलना शुरू कर दिया। देखने में आ रहा है की आज हर कोई महंगाई बढ़ने का बहाना बना कर लोगों से ज्यादा पैसे वसूल रहा है।

सच तो ये है की जिन्होंने GST में रजिस्ट्रेशन कराया भी है वो भी ईमानदारी से सरकार को GST नहीं दे रहे, क्योंकि उन्हें तो ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाना है इसलिए उन्होंने तो GST से बचने का रास्ता निकाल लिया है। 

मोदी सरकार में ग्राहक को लूटने का नया खेल ये है की दुकानदार, व्यापारी, बिजनेसमैन आदि लोग GST बिल ग्राहक को तो नहीं देते लेकिन GST के नाम पर हर सामान पर दुगुने तिगुने दाम जरूर वसूल रहे हैं।

दुकानदारों, व्यापारियों को लोगों से ज्यादा पैसे वसूलने का एक नया बहाना सरकार ने दे दिया है, जिसका नाम है GST. जिसको देखो वही GST के नाम पर ग्राहकों को ठगने में लगा है। जिसने न तो GST रजिस्ट्रेशन कराया है न तो सरकार को एक रुपया GST दे रहा है वो भी GST के नाम पर ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूल रहा है।

सीधी सी बात है की जब सरकार को GST दे ही नहीं रहे हो तो पब्लिक से कैसे वसूल सकते हो? 

सरकार ने GST तो लागू कर दिया लेकिन उसके क्या क्या साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं ये जानने की कभी कोशिश की है?

क्या सरकार को पता है की GST के नाम पर किस तरह लोकल मार्केट में आम आदमी से दुगुने तिगुने पैसे वसूले जा रहे हैं? 

GST के साइड इफेक्ट को इस उदाहरण से समझिए...

एक मिडिल क्लास व्यक्ति जो पिछले साल तक आटा 20₹ किलो में खरीदता था वही आटा सरकार के आटा, चावल आदि पर GST लगाने की घोषणा करते ही मार्केट में 40₹ किलो बिकने लगा। बहाना यह की सरकार ने GST लगा दिया है।

क्या यही हैं अच्छे दिन? इसी अच्छे दिन के सपने दिखाए मोदी जी ने हम सबको?

आटा, चावल, दाल, दूध हर चीज पर GST लगा दिया जिससे आम आदमी के मुंह का निवाला दुगुना महंगा हो गया।

घरेलू गैस सिलिंडर की सब्सिडी चुपके से खत्म कर दी जिसके चलते हर आम आदमी के किचन का बजट गड़बड़ा गया। जो गैस सिलिंडर 500₹ का पड़ता था वही अब 1200₹ का हो गया। 

क्या आमदनी को भी बढ़ाया सरकार ने आम आदमी की? आप सिर्फ समाज के एक ही तबके को महंगाई की चक्की में पीसते जा रहे हैं, ये कहां तक उचित है?

गैस सिलिंडर के दाम दुगुने, आटा, चावल, दाल, तेल, दूध सबके दाम पिछले 2 सालों में दुगुने तिगुने हो गए, क्या यही अच्छे दिन हैं? 

मिडिल क्लास को वोट के बदले सरकार ने क्या दिया? महंगाई की मार? मुंह का निवाला भी दुगुना महंगा? 

लगता है इस सरकार का एक ही मिशन है, मिडिल क्लास की सभी सुविधाओं में कटौती कर, उनसे ज्यादा से ज्यादा टैक्स वसूल कर गरीब तबके को सब कुछ मुफ्त बांट अपना वोट बैंक मजबूत करना। 

मोदी सरकार को वोट देकर सबसे ज्यादा कोई ठगा गया है तो वो है मिडिल क्लास का आम आदमी, जिसके पास न तो सरकारी नौकरी है, न तो बिजनेस करने के लिए पूंजी और न ही उसे सरकार द्वारा दी जा रही मुफ्त राशन, मुफ्त आवास, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ लेने की योग्यता।

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