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शेर सिंह राणा: कहानी एक वीर राजपूत की Sher Singh Rana Story in Hindi

Phoolan Devi Murder Case: 14 फरवरी 1981 को उत्तर प्रदेश कानपुर जिले के बेहमई गांव में एक हत्याकांड हुआ था। इस हत्याकांड को बेहमई कांड के नाम से भी जाना जाता है। फूलन देवी (Phoolan Devi) ने अपने गिरोह के साथ मिलकर 22 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बेहमई कांड के बाद फूलन देवी चंबल की बैंडिट क्वीन (Bandit Queen) के नाम से फेमस हुईं थीं। 
Phoolan Devi Birth: फूलन का जन्म 10 अगस्त 1963 को गुरहा का पुरा जालौन में हुआ था। फूलन के पिता देवी दीन खेत मजदूर थे। महज 11 साल की उम्र में दस्यू सुंदरी की शादी 24 साल के पुत्तीलाल से कर दी गई। फूलन देवी के पिता की जमीन पर उसके चाचा ने कब्जा कर लिया था। फूलन देवी ने जब चाचा से जमीन मांगी तो चाचा ने फूलन पर डकैती का मामला दर्ज करा दिया था। इस मामले में फूलन को जेल भी हुई थी। जेल से आने के बाद शादी से दुखी तथा चाचा से विवाद के चलते उसकी निकटता डकैत बाबू गुर्जर से बढ़ गई। बाबू ने उस पर जब बुरी नजर डाली तो उसी की मल्लाह जाति के विक्रम मल्लाह ने बाबू गुर्जर की हत्या कर दी।

फूलन तथा विक्रम ने अपना अलग गिरोह बनाया। इसके बाद बीहड़ में सक्रिय लालाराम श्रीराम ने विक्रम की हत्या कर फूलन के साथ गैंगरेप किया था। इसका बदला लेने के लिए फूलन ने बेहमई (कानपुर देहात) में ठाकुर जाति के 22 लोगों की हत्या कर दी। बेहमई कांड के बाद फूलन (Phoolan Devi) आतंक का पर्याय बन गई थी।

Phoolan Devi Surrender: उसके बाद सरकार द्वारा 100 से ज्यादा लोगो की हत्यारी फूलन देवी से आत्मसपर्मण करवाया गया और 11 साल जेल में बिताने के बाद मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी से टिकट देकर उसे मिर्जापुर सीट से सांसद बनवा दिया।
Phoolan Devi Murder: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की सांसद फूलन देवी 25 जुलाई 2001 को जब संसद से दिल्ली स्थिति अपने आवास पर आ रही थी तभी शेर सिंह राणा ने
दिनदहाड़े गोली मार कर फूलन देवी की हत्या कर दी थी। शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) ने फूलन देवी को मारकर 22 राजपूतो की मौत का बदला लिया था।


इस घटना के 48 घण्टे बाद 27 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा ने देहरादून प्रेस क्लब में खुद मीडिया के सामने ये बयान दिया कि उसने ही फूलन देवी की हत्या की है और खुद पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। जिसके बाद शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) को देश की सबसे सुरक्षित जेल तिहाड़ भेजा गया। 

Kandhar Plane Highjack: वर्ष 2000 में कंधार विमान अपहरण की घटना के वक्त तत्कालीन विदेश मंत्री स्व. जसवंत सिंह (Jashwant Singh) जब अफगानिस्तान गए तो वहां तालिबान सरकार ने ही उन्हें यह बात बताई थी कि अफगानिस्तान में जहां मोहम्मद गोरी की कब्र है, उसके पास ही पृथ्वीराज चौहान की समाधि भी है। कब्र देखने आने वालों के लिये यह अनिवार्य है कि वे पहले पृथ्वीराज चौहान की समाधि को जूते मारे, फिर कब्र के दर्शन करें। जशवंत सिंह भारत लौटकर भी कुछ कर नहीं पाये, जबकि इस घटना का जिक्र मीडिया में खूब हुआ था। 

             पृथ्वीराज चौहान की समाधि 

मोहम्मद गौरी की पक्की मजार

Sher Singh Rana Prithviraj Chauhan ki Asthiya: जब शेर सिंह राणा सांसद फूलन देवी की हत्या के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद थे तब अखबार में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की समाधि संबंधी एक खबर प्रकाशित हुई थी। उसे पढक़र एक जेल में बंद एक तालिबानी आतंकी ने हंसी उड़ाई थी कि भारतीयों में इतना दम नहीं कि वे अफगान जाकर चौहान की अस्थियां ला सकें। यह बात उनके दिल में घर कर गई और शेर सिंह राणा देश की सबसे सुरक्षित तिहाड़ जेल से 17 फरवरी 2004 की सुबह अपने साथियो सहित सुनियोजित तरीके से फरार हो गए। एक योजना के तहत उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में तीन पुलिस के जवान 
फर्जी कोर्ट वारंट के साथ तिहाड़ जेल आये और अपने यहां पेशी का कोर्ट ऑर्डर दिखाकर शेर सिंह राणा को फरार करा ले गये।

शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) ने देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल की सुरक्षा की ऐसी धज्जियां उडाईं कि जेल प्रशासन से लेकर सरकार तक हिल गई थी। दिल्ली पुलिस जब उन्हें खोजने में नाकाम रही तो उसने शेर सिंह राणा पर 50,000 रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया था, लेकिन शेर सिंह की मंजिल तो अफगानिस्तान थी।

तिहाड़ जेल से फरार होने के बाद Sher Singh Rana ने रांची निवासी संजय गुप्ता के नाम पते पर फर्जी पासपोर्ट बनवाया और कोलकाता चले गए। वहां से बांग्लादेश का वीजा बनवाकर वहां गए। वहां बाकायदा यूनिवर्सिटी में इंग्लिश ऑनर्स में एडमिशन ले लिया। फिर वहां से फर्जी बांग्लादेशी पासपोर्ट बनवाकर दुबई होते हुए अफगानिस्तान के शहर काबुल पहुंचे। फिर वहां से कंधार पहुंच गये। वहां 5-6 दिन रहकर उन्होंने पृथ्वीराज चौहान की समाधि खोजी और रेकी की। वहाँ समाधि नहीं मिली तो फिर वापस काबुल गए और जानकारी मिलने पर वहाँ से गजनी शहर पहुंचे। लगभग 2 महीने लग गए उन्हें समाधि खोजने में। वहाँ वे शादाब खान नाम के पाकिस्तानी ठेकेदार बनकर रहे। फिर तालिबान लड़ाकों से बचते हुए शेर सिंह राणा ने अवसर देखकर एक रात पृथ्वीराज चौहान की समाधि खोदकर उसमें से मिट्टी और अस्थियां निकाल लीं और लेकर भारत लौट आये। इस दौरान शेर सिंह राणा अपनी जान जोखिम में डालकर लगभग 3 माह अफगानिस्तान में रहे।

    पृथ्वीराज चौहान की समाधि से अस्थियां                     निकालते शेर सिंह राणा

Sher Singh Rana Prithviraj Chauhan ki Asthiya: इस पूरी घटना का बाकायदा शेर सिंह राणा ने वीडियो भी बनाया। इसके बाद राणा ने अपनी मां की मदद से गाजियाबाद के पिलखुआ में पृथ्वीराज चौहान का मंदिर बनवाया, जहां पर उनकी अस्थियां आज भी रखी हुई है। बाद में क्षत्रिय महासभा ने कानपुर के निकट पृथ्वीराज चौहान का स्मारक बनवाया।

शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) ने सबूत के तौर पर वहाँ से वीडियो और सारे चित्र भी लाये थे जो सहारा समय न्यूज़ चैनल पर प्रसारित किये जा चुके हैं। जिन्हें आप नीचे दिए गए लिंक पर देख सकते हैं👇👇


बता दें कि जिस वक़्त शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) अफगानिस्तान गए थे उस वक़्त वहाँ तालिबानी शासन था तथा काफिरो को देखते ही मार डालने के आदेश थे।

गौरतलब है कि परमवीर सम्राट पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) अपने दुश्मन मोहम्मद गौरी (Mohammad Gauri) को मार कर वीरगति को प्राप्त हुए थे। बाद में गौरी की सेना ने अफगानिस्तान के गजनी शहर में गौरी की मजार बनवायी और उसके पैरों की ओर पृथ्वीराज चौहान की समाधि बनाई गई। पृथ्वीराज चौहान को अपमानित करने के लिए यह नियम बनाया गया की जो भी मोहम्मद गौरी की मजार पर जियारत (प्रार्थना) करने आएगा वो पहले पृथ्वीराज चौहान की कब्र पर दो दो जूते मारेगा। इसके लिए वहाँ बाकायदा जूतियां भी रखी गयी थी।

Phoolan Devi Murder: शेर सिंह राणा और फूलन देवी

▶वर्ष 1980- फूलन देवी अपने सरदार विक्रम सिंह को मारकर डाकुओ की सरदार बनी। सन् 1980 और 80 के दशक में एक मुस्लिम डाकू गिरोह को अपने में मिलाया। इस प्रकार फूलन गिरोह में डाकुओ की संख्या 180+ तक पहुंच गयी।

▶Behmai Kand: वर्ष 1981- उत्तरप्रदेश में कानपूर के पास बेहमई गाव में फूलन देवी ने 200 डाकुओ के साथ धावा बोला और बन्दूकों की नोक पर गाव को आधी रात में घेरा और उसी रात 20 राजपूतो की एक क़तार में खड़े करके निर्मम हत्या कर दी गयी।

▶वर्ष 1981- बेहमई काण्ड बहुत चर्चित हुआ। इसके बाद क्षत्रीय स्वाभिमान रक्षा संगठन का गठन हुआ पर तत्कालीन सरकार फूलन के साथ रही।

▶वर्ष 1982 डाकू महेंद्र सिंह राजपूत गिरोह ने फूलन देवी गिरोह के 35 डाकुओ को मार गिराया जिसमे 20 दलित और 15 मुस्लिम थे।

▶वर्ष 1982 दिसंबर- डाकू निर्भय सिंह (बाबू) ने फूलन के 20 और साथियो को मार गिराया। दुश्मन का दुश्मन दोस्त की खातिर दोनों गिरोह निर्भय सिंह और महेंद्र सिंह बाबू दोनों एक हुए और इसी के साथ चम्बल के बीहडो पर इनका राज कायम हुआ।

▶वर्ष 1983 जनवरी- राजपूत डाकुओ के लगातार हमलो से फूलन देवी और उसका गिरोह सकते में आ गए। एक एक कर फूलन गिरोह की लाशे बिछती गयी, उसके सहयोगी मुस्लिम गिरोह का पहले ही खात्माँ हो गया। बाबा फ़क़ीर पहले ही सर्रेंडर कर चुका था। अब बचे थे फूलन देवी और 80 डाकू।

▶Phoolan Devi Surrender: 22 फरवरी 1983 को फूलन देवी ने मध्यप्रदेश के तत्कालीन राजपूत मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह (Arjun Singh) के सामने और कोई चारा न देख अपने 100 सदस्यों के साथ भिंड में आत्मसमर्पण कर दिया। उसने यह समर्पण राजपूत सरकार पर विश्वास की वजह से किया था।
▶1983 से 1994 तक फूलन देवी (Phoolan Devi) जेल में रही और बाद में उसे आरोप मुक्त कर दिया गया। फूलन देवी के भाई को सरकारी नौकरी दी गयी और आत्मसमर्पण किये डाकुओ में से कोई भी 8 साल से ज्यादा जेल में नही रहा। सभी के आजीवन कारावास और मृत्युदंड माफ़ किये गए।

▶वर्ष 1995- फूलन देवी ने हिन्दू धर्म का त्याग कर बुद्ध धर्म अपनाया पर राजपूत, ब्राह्मण और बनियो से आज भी उसे उतनी ही नफरत थी।

▶Phoolan Devi Political Career: वर्ष 1996- फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी की तरफ से मिर्जापुर से चुनाव लड़ा और मुस्लिम दलित गठजोड़ से चुनाव जीतकर सांसद बन गयी। 

▶Phoolan Devi Murder: वर्ष 2001- बेहमई हत्याकांड का बदला लेने के लिए 23 वर्षीय राजपूत युवा शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) ने दिल्ली में संसद के सामने ही दिनदहाड़े फूलन देवी की हत्या कर राजपूत अपमान का बदला लिया। शेर सिंह राणा का कहना था की 20 क्षत्रिय विधवाओ को रोता बिलखता देख उनका खून खौल उठता था। इसी वजह से उन्होंने फूलन देवी को मारा था।

▶Sher Singh Rana Arrested: शेर सिंह राणा को पुलिस ने गिरफ्तार किया और देश की सबसे सुरक्षित तिहाड़ जेल में डाला गया। 

Sher Singh Rana Prithviraj Chauhan ki Asthiya

▶वर्ष 2004- देश की सबसे सुरक्षित तिहाड़ जेल से शेर सिंह राणा सभी साथियो सहित फरार हो गए।

▶वर्ष 2004 से 2006 तक फरार होकर शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) सीधे अफगानिस्तान गए और वहाँ से सम्राट पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां और मिटटी लेकर लौटे। इस काम में उनकी सुभाष ठाकुर ने काफी मदद की थी। वे वहाँ के एकमात्र मंदिर भी जाकर आये जहाँ पर सिख पुजारी है। उनका यह वीडियो "राणा का राज" सहारा समय न्यूज़ चैनल पर प्रसारित हो चुका है। 

▶17 मई 2006 को शेर सिंह राणा को कोलकाता पुलिस ने पुनः गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया। 

▶14 अगस्त 2014 को शेर सिंह राणा के 11 अन्य साथियो को कोर्ट ने बरी कर दिया और उन्हें फूलन देवी के कत्ल के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई गई।

▶22 अक्टूबर 2016 को दिल्ली हाइकोर्ट ने शेर सिंह राणा की उम्र कैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें सशर्त जमानत दे दी। जिसके बाद उन्होंने राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी (RJP) का गठन किया।


Sher Singh Rana Birth: शेर सिंह राणा का जन्म 17 मई 1976 को उत्तराखंड के रुड़की में हुआ था। उनका असली नाम पंकज सिंह पुंढीर है। तिहाड़ जेल में रहते हुए शेरसिंह राणा सन 2012 में उत्तरप्रदेश के जेवर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके है। लेकिन वे हार गये थे।

Sher Singh Rana Marriage: ठुकरा दी थी दहेज में मिली करोड़ों की संपत्ति

शेर सिंह राणा की शादी छतरपुर जिले के पूर्व विधायक राणा प्रताप सिंह की बेटी प्रतिमा सिंह से हुई है। ये शादी 20 फरवरी 2018 को उत्तराखंड के रुड़की में हुई थी। बताया जाता है कि इस दौरान शेर सिंह राणा को दहेज के तौर पर 10 करोड़ की खदान और 31 लाख रुपए दिए गए थे लेकिन शेर सिंह राणा ने दहेज लेने से इंकार कर दिया था। शेर सिंह राणा को फूलन देवी की हत्या के मामले में कोर्ट ने आजीवन कारावस की सजा सुनाई थी। जमानत पर बाहर आने के बाद शेर सिंह राणा ने शादी की थी।
शेर सिंह राणा ने अपनी शादी में एक बड़ा सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने दहेज में मिलने वाली 10 करोड़ कीमत की खदान और शगुन में मिल रहे 31 लाख रुपए को ठुकराते हुए सिर्फ चांदी का सिक्का ही लिया।

2008 में विधायक थे बेटी के पिता

छतरपुर जिले के बड़ा मलहरा से सन 2008 में विधायक रहे राणा प्रताप सिंह बुंदेला की बेटी से शेर सिंह ने शादी की है। प्रतिमा की मां का नाम संध्या राजीव बुंदेला है, जो छतरपुर में रहती हैं।

Sher Singh Rana Wife: पॉलीटिकल साइन्स में MA है शेर सिंह राणा की पत्नी प्रतिमा

प्रतिमा ने पॉलीटिकल साइन्स में MA किया है। प्रतिमा की मां संध्या राजीव बुंदेला छतरपुर के घुवारा नगर पालिका अध्यक्ष थी। वे क्षत्रिय महासभा से जुड़ी थी। ग्वालियर में क्षत्रिय महासभा का एक कार्यक्रम हुआ था, जिसमें शेरसिंह भी आए थे। इसी कार्यक्रम में संध्या ने शेरसिंह को पहली बार देखा था। इसी दौरान संध्या ने राणा को प्रतिमा के लिए पसंद कर लिया था।
Sher Singh Rana Movie: बहुत कम लोगों को पता है की शेर सिंह राणा पर एक फिल्म भी बनी है। जिसका नाम है "Sher Singh Rana-The End of Bandit Queen" जिसके प्रोड्यूसर हैं जे.एस. वालिया और अभिनेता हैं नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी (Nawajuddin Siddiqui)

शेर सिंह राणा के मुताबिक राष्ट्र के गौरव को बढ़ाने के इस कार्य को पूर्ण करने के बाद से वे बेहद संतुष्ट हैं। क्योंकि उन्होंने जो चुनौती स्वीकार की, उसे पूरा भी किया। 
शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) को देश का गौरव जान की बाजी लगाकर लौटाने का सम्मान तो हर हाल में मिलना चाहिये। जंग का कोई नियम नहीं होता, कोई मर्यादा नहीं होती और लुटेरों, आततायियों, आक्रमणकारियों के साथ तो बिलकुल नहीं, तब शेर सिंह राणा को शाबाशी से वंचित कैसे किया जा सकता है?

आखिरकार आजादी के गरम दल व गरम खून के सेनानियों ने भी अंग्रेजों से लोहा लेने में अंग्रेजों के तौर-तरीके ही अपनाये थे, जो कि कतई गलत नहीं थे तो शेर सिंह राणा (Sher Singh Rana) का यह दुस्साहसिक कदम भी सराहा जाना चाहिये।


*यह लेख शेर सिंह राणा द्वारा मीडिया को दिए गए इंटरव्यू पर आधारित है

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