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वो दौर जब कर्ज में डूबे अमिताभ बच्चन के घर पर बैंकों ने लगा दी थी नीलामी नोटिस, फिर क्या हुआ? पढ़ें...

आज भले ही बच्चन फैमिली बॉलीवुड की एक सम्पन्न फैमिली में से एक है। लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब अमिताभ बच्चन पूरी तरह दिवालिया होकर आकंठ कर्ज में डूब चुके थे। यहाँ तक कि उनका घर तक नीलाम होने की स्थिति आ चुकी थी। 

उस बुरे दौर में पूरी फिल्मी दुनिया, शिवसेना से लेकर कांग्रेस पार्टी सब अमिताभ बच्चन से मुंह मोड़ चुके थे। अमिताभ बच्चन की एबीसीएल लिमिटेड नामक कंपनी और 2 टीवी चैनल भारी घाटे में चल रहे थे। उस वक्त अमर सिंह अमिताभ बच्चन के लिए एक मसीहा बनकर सामने आए।


अमर सिंह ने ना सिर्फ अमिताभ बच्चन को पैसों से मदद की बल्कि उन्हें उस वक्त समाजवादी पार्टी के द्वारा उत्तर प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर भी बनवाया। अमर सिंह के सहयोग से ही अमिताभ बच्चन का कैरियर धीरे-धीरे पटरी पर आया। अमर सिंह ने ही उन्हें कौन बनेगा करोड़पति टीवी शो दिलवाया और उस वक्त न्यूज़ चैनलों में भी दिखाया गया था कि जब कभी अमर सिंह मुंबई पहुंचते थे तब अमिताभ बच्चन उन्हें रिसीव करने के लिए एक शोफर की तरह कार लेकर खुद चलाते हुए एयरपोर्ट के बाहर उनका इंतजार करते थे और अमर सिंह मुंबई में किसी होटल या अपने फ्लैट में नहीं बल्कि अमिताभ बच्चन के घर पर ही ठहरते थे।
फिर जैसे ही अमिताभ बच्चन की आर्थिक स्थिति सुधरी और वह कर्ज के जंजाल से मुक्त हो गए उन्होंने अमर सिंह से मुंह फेर लिया। इस सदमे के कारण अमर सिंह महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। वहीं अमिताभ बच्चन जैसा अहसानफरामोश व्यक्ति कभी उनका हालचाल लेने तक नहीं गया। और तो और बच्चन फैमिली का कोई भी शख्स अभी हाल ही में उनके मरने पर उनके घर शोक प्रकट करने तक नहीं गया।


इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं बच्चन फैमिली और महानायक अमिताभ बच्चन किस दर्जे के लोग हैं। कहने का मतलब कि पर्दे पर पाखंड करने वाले ये ढोंगी लोग असल जिंदगी में भी पाखंड ही करते हैं। इन्हें सिर्फ पैसों की चमक दमक से ही मतलब है। इंसानियत का इनके जीवन में कोई मोल नहीं है। पर्दे पर झूठे चरित्र निभाते निभाते इन लोगों का वास्तविक चरित्र भी नकली हो चुका है। इन लोगों की मानवीय संवेदनाएं मर चुकी हैं।

पैसे और काम के लालच के कारण बच्चन फैमिली ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर एक शब्द तक नहीं कहा। जिन उत्तर भारतीयों की बदौलत अमिताभ बच्चन आज महानायक कहलाते हैं उनके समर्थन में इस अभिनेता ने एक ट्वीट तक करना जरूरी नहीं समझा। वहीं इनकी पत्नी जया बच्चन ने बॉलीवुड के भ्रष्ट लोगों और ड्रग माफियाओं के बचाव में संसद में खुलकर बयान दिया और बॉलीवुड की बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलन्द करने वाले रवि किशन और कंगना रनौत को थाली में छेद करने वाला तक कहा।


अब सवाल ये उठता है कि वास्तव में गद्दार कौन है बच्चन फैमिली या कंगना और रवि किशन?

अमर सिंह जैसे आड़े वक्त में काम आनेवाले इंसान के साथ गद्दारी इन लोगों ने की। सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर ये परिवार खामोश रहा। उत्तर भारतीयों ने इन्हें देवता की तरह पूजकर महानायक बनाया और इन्होंने उन सभी लोगों के साथ गद्दारी की। जो लोग इन्हें अपना आदर्श, अपना हीरो मानते थे उनके समर्थन में इनके मुंह से कभी दो शब्द नहीं फूटे। हिन्दू होते हुए भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के शुभअवसर पर ये पूरा परिवार खामोश रहा। कंगना रनौत के ऑफिस ढहाए जाने पर भी ये लोग खामोश रहे। लॉकडाउन में उत्तर भारतीयों मजदूरों की मदद को सोनू सूद आगे आये लेकिन इन लोगों का कहीं पता नहीं चला। क्योंकि इन्हें तो सिर्फ अपना स्वार्थ दिखाई देता है। इन्हें शिवसेना, खान गैंग, ड्रग माफिया और नेपोटिस्म के हिमायती लोगों को खुश रखना है क्योंकि इन्हें अपनी रोजी रोटी उनके ही संरक्षण में चलानी है।


जया बच्चन ने रवि किशन और कंगना द्वारा बॉलीवुड के खिलाफ बोलने पर उन्हें 'थाली में छेद करने वाला' कहा है तो मै उनसे कहना चाहूंगा...

वैसे तो नही बोलना चाहिये सलमान और ऐश की कहानी तो पता ही है। रेखा और अमिताभ की कहानी भी सबको पता है। आपकी बेटी खुद चरस गान्जे कोकेन की शौकीन है ओर आप थाली मैं छेद नही करना चाहते ये भी बडी विडम्बना है।

जब आपके परिवार पर मुसीबत थी, सब कुछ बिकने के कगार पर था। कर्ज ना दे पाने के कारण आपके पति को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती थी। दुनिया जानती है और आप भी जानते हो उस समय, आपके परिवार का साथ ठाकुर अमर सिंह जी ने दिया था अपना राजनैतिक कैरियर दांव पर लगाकर।
अमर सिंह आखिरी समय में महीनों तक दुबई के हॉस्पिटल में उपचाराधीन रहे, वहीं पर उन्होंने आखिरी सांस ली। न तो आपके परिवार में से कोई एक बार भी हॉस्पिटल उनको देखने गया, न उनके अंत्येष्टि कार्यक्रम में ही सम्मिलित हुआ।
अब बताएं थाली में छेद किसने किया है एहसानफ़रामोश कौन है?

अब आप खुद निर्णय करें कि बच्चन फैमिली क्या उस सम्मान और इज्जत की वाकई हकदार हैं जो हम सब आज तक इन्हें देते आये है? 


अब समय आ गया है इनको यह बताने का कि जिस जनता ने इन्हें आज तक सिर पर बिठाकर पूज्यनीय बनाया वही जनता अब खाक में भी मिला सकती है।

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