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योगी आदित्यनाथ और आज़म खान के बीच दुश्मनी की असली कहानी

हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो आज भी शायद ये न जानते हों कि योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और आज़म खान (Azam Khan) के बीच दुश्मनी की असली वजह क्या है?

तो चलिए आज हम आपको इस अदावत के पीछे की असली कहानी बताते हैं।

वर्ष 1999- यूपी में मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) मुख्यमंत्री थे लेकिन असल में सत्ता तो आजम खान ही चला रहे थे और पूरे उत्तरप्रदेश में अपना जिहादी एजेंडा लागू करने में लगे हुए थे। 


गोरखपुर के एक बड़े डॉक्टर और उनकी पत्नी भी आजम खान के इस जिहादी एजेंडे को आगे बढ़ाने में अपना पूरा सहयोग कर रहे थे। उन्ही दिनों महाराजगंज के पचरुखिया गांव में श्मशान घाट की जमीन पर आजम खां के लोगों ने कब्जा कर उसे कब्रिस्तान बना दिया था। तब योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के सांसद हुआ करते थे। खबर होने पर जब योगी आदित्यनाथ वहां गए तो उनके ऊपर गोलीबारी भी की गई और योगी आदित्यनाथ को फंसाने के लिए आजम खान के इशारे पर एक साजिश के तहत गोरखपुर की उसी डॉक्टर नेत्री के सरकारी सिक्योरिटी गार्ड जो एक पुलिस कांस्टेबल था उसे आजम खान के लोगों ने गोली मार दी और उसकी हत्या का इल्जाम योगी आदित्यनाथ के ऊपर डाल दिया।


अपनी साजिश से उस वक्त तो शायद आजम खान ने यही सोचा होगा कि वह योगी आदित्यनाथ को पूरी जिंदगी हत्या के केस में जेल में सड़ा देंगे। लेकिन हुआ ये कि योगी जी गिरफ्तार हुए और सिर्फ 19 दिन ही जेल में रहे। जब फॉरेंसिक रिपोर्ट आई तो पता चला की गोली तो एक देसी कट्टे से मारी गई थी, तब जाकर 19 दिनों बाद योगी आदित्यनाथ जेल से छूटे और इस प्रकार आज़म खान की साजिश नाकाम हुई।

इस घटना के बाद योगी आदित्यनाथ संसद में गए और घटना का जिक्र करते हुए संसद में उनके आंसू भी निकल पड़े थे। उन दिनों योगी जी के संसद में रोने का आजम खान ने खूब जी भरकर मजाक भी उड़ाया और तंज भरे शब्द भी कहे कि 'योगी कभी रोते नहीं है' जिसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने भी चैलेंज देते हुए कहा था 'आजम खान तुम भी बहुत बड़े मौलवी बनते हो, तुम्हें रुलाकर दिखा दूंगा कि मौलवी कैसे रोते हैं।'


और नियति का खेल देखिए आज वो स्थिति है कि आजम खान बार-बार फूट-फूटकर रो रहे हैं। 
यही नहीं उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को भी कई-कई बार रोते देखा गया है। 

कहा जाता है कि वक्त किसी का सगा नहीं होता। वक्त बदला और वही आजम खान जो उत्तर प्रदेश के सुपर चीफ मिनिस्टर हुआ करते थे। जो डीएम, कलेक्टर को कुछ नहीं समझते थे और उनसे कहते थे कि 'मैं तुमसे जूते साफ करवा लूंगा' वो आज इस कदर मजबूर और लाचार हैं कि उन्हें देखकर लोगों को दया आती है।


सच तो ये है कि उन दिनों आज़म खान ने उत्तर प्रदेश के हिंदुओं को इतनी बुरी तरह से प्रताड़ित किया कि धीरे-धीरे हिंदू जागृत हुए और संगठित होने लगे और यही कारण बना समाजवादी पार्टी की हार और भाजपा की वापसी का।

वक्त बदला, सत्ता बदली और योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। लेकिन आजम खान शायद ये बात भूल गए  कि योगी जी बीजेपी के दूसरे नेताओं की तरह नहीं है कि 'चलो भाई माफ करो भूल जाओ'। योगी जी मुख्यमंत्री बने और फिर आजम खां के कुकर्मों की फाइलें खुलती चली गई। जिसकी-जिसकी जमीन सत्ता के ज़ोर पर आज़म खान ने कब्जा किया था वह सभी किसान सामने आए। फिर केस दर्ज होते चले गए और एक के बाद एक 90 केस दर्ज हो गए। जिसका परिणाम ये निकला कि आजम खान को लगातार ढाई साल जेल में सड़ने पर मजबूर होना पड़ा।


मतलब 19 दिनों का बदला ढाई साल। इसे कहते हैं सूद समेत हिसाब बराबर करना। वैसे भी बुरे काम का अंजाम तो बुरा ही होता है। इसलिए आज़म का अंजाम तो बुरा होना ही था।

सच तो ये है कि आज़म खान आज भी जेल में ही सड़ रहे होते लेकिन कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से आज़म खान को 148 के तहत रिहा करवा दिया है। लेकिन कपिल सिब्बल शायद यह भूल गए हैं कि अभी भी कुछ फाइलें ऐसी हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट का 148 भी काम नहीं करेगा।

अभी देखते रहिए, कुछ दिनों बाद यही आजम खान एक बार फिर जेल में ही सड़ते नजर आएंगे, क्योंकि इनके कुकर्मों की लिस्ट अभी बहुत लम्बी है। 


आज़म खान का यह अंजाम उत्तर प्रदेश के उन सभी जिहादी मानसिकता वाले नेताओं के लिए एक चेतावनी है जो ये सोचते हैं कि वह उत्तर प्रदेश को गजवा-ए-हिन्द बना देंगे।

-जितेंद्र प्रताप सिंह की फेसबुक वॉल से साभार

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