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क्या तथाकथित सेक्युलरों का इकोसिस्टम राष्ट्रवादियों पर हावी हो रहा है?

क्या अर्नब का केस महाराष्ट्र के बाहर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता? तलोजा जेल में खूँखार आतंकियों/अपराधियों को रखा जाता है। पूरा तलोजा क्षेत्र टोपी वालों से पटा पड़ा है, ये सर्वविदित है। ऐसे में कोई भी सज़ायाफ्ता अपराधी उसे मार सकता है। मार देगा तो आप और हम क्या कर लेंगे? ट्वीट कर देंगे? श्रद्धांजलि दे देंगे? और भाजपाई उसे मुद्दा बनाकर चुनाव में वोट मांग लेंगे?

दोष सिद्ध हो तो आप उसे फांसी पर चढ़ा दीजिये लेकिन जब तक वह अपराधी सिद्ध नहीं होता उसे डिटेन करना, वकील से न मिलने देना, जबरन जेल में ठूंस देना, जेलर द्वारा मारपीट होना। जैसा कि अर्नब ने कहा कि उसे कुछ लिक्विड भी पिलाया गया जबरन...इससे क्या सिद्ध होता है? उसे मारने की पूरी बिसात बिछ चुकी है। इससे सिद्ध होता है कि यह बदले की कार्रवाई ही है।


दही हांडी, जलीकट्टू जैसे उत्सवों तक में स्वतः संज्ञान लेने वाला सुप्रीम कोर्ट कुम्भकर्णी नींद सो रहा है...और वो तब तक सोता रहेगा जब तक केन्द्र का ज़रा सा इशारा नहीं हो जाता।

वो कहते हैं कि आपसे राष्ट्रवाद पर लिखने/बोलने को भाजपा या मोदी ने कहा था क्या? नहीं न? हमारी संवैधानिक विवशताएँ हैं, लॉ & आर्डर स्टेट का मसला है, मामला विचाराधीन है, हम प्रेस की आज़ादी के समर्थक हैं, अर्नब के साथ ग़लत हो रहा है...आदि इत्यादि और इतिश्री !!

बाक़ी सब अपना अपना देख लो...

मुझे चिन्ता इस बात की नहीं है कि केन्द्र कुछ कर क्यों नहीं रहा...तमाम संवैधानिक रास्ते हैं बशर्ते कुछ करने की मंशा तो दिखे? मुझे चिन्ता इस बात की है कि आज हमें आपको पढ़ पढ़कर जो हज़ारों लोग राष्ट्रवादी विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं, वे कब तक अपनी जान जोखिम में डालकर लिखते/बोलते रहेंगे? आज यदि अर्नब जैसे बड़े पत्रकार के साथ यह सब हो रहा है तो आम व्यक्ति की क्या स्थिति होगी?


सेक्युलरों का ईको सिस्टम बेहद सशक्त है। यह एक बार फिर से सबके सामने है। पूरी की पूरी सरकारें मैदान में उतर जाती हैं। वहीं पूर्ण बहुमत वाली राष्ट्रवादी सरकार सिवाय ट्वीट करने के कुछ नहीं कर पाती...यह भी जनता देख और समझ रही है...जो कि बहुत बड़ा आघात पहुंचाएगी राष्ट्रवादी विचारधारा को।

#IndiaWithArnab 
#FreeArnab 
#SaveDemocracy
#WeSupportArnabGoswami

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