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किसको पसंद है ईमानदार सरकार? क्या वोटर्स खुद बेईमान हो रहे हैं?

जो भी चुनाव परिणाम आ रहे हैं उसे देखने से तो यही लगता है कि इस देश के लोगों के लिए कुछ भी कर दो, उनके लिये घर बनवा दो, गैस सिलेंडर दे दो, शौचालय बनवा दो, मेडिकल इन्श्योरेंस दे दो, क़र्ज़ा माफ़ कर दो, फिर भी ये भिखारी के भिखारी ही रहेंगे और चुनाव के वक़्त जो इनको शराब पिला देगा, ये उसी को वोट देंगे।

सुविधाएं भले ही सारी ले लेंगे लेकिन वोट डालते समय अपनी जाति, अपना धर्म याद आने लगेगा। तब अपनी जाति और धर्म वाली पार्टी को वोट दे आएंगे, चाहे उसने इनके लिए भले ही आजतक कुछ भी न किया हो।

अब आप ही सोचिये जब वोटर्स की सोच इस स्तर की होगी तो देश में बदलाव कैसे आएगा? क्या उम्मीद कर सकते हैं आप?

देश के कई दुकानदार, व्यापारियों को ईमानदारी से टैक्स भर के काम करना मंँज़ूर नहीं, पर रिश्वत दे कर काम करवाना मंँज़ूर है।

पैसे तो दोनो ही जगह देने पड़ते है, पर ख़ून में जो मूर्खों वाला अहंँकार और चोरी का डीएनए है उसका कोई इलाज नहीं है।

हम पहले रोते रहे इस बात को लेकर की भ्रष्टाचार हटाओ, भ्रष्टाचार हटाओ। जब भ्रष्टाचार हटाने वाला आ गया, तो अब लोग रो रहे हैं कि भ्रष्टाचार ही जीवन और धंँधे-रोज़गार के लिए अच्छा था।

कई जाति के लोग रोते रहेंगे कि हमें ऊपर उठाओ, ऊपर उठाओ। जैसे ही उनको ऊपर उठाने वाला आ गया, तो फिर रोने लगे कि नहीं-नहीं हमें नीचे ही रहने दो, क्योंकि हमें ऊपर उठने के लिये मेहनत नहीं करनी, हमें मुफ़्त में सारी सुविधा देते रहो।

ऐसे में जब सारा देश आतंँकवादी हमलों से घबराया रहता था। एक ईमानदार देशभक्त पीएम ने आकर हमें सुरक्षा प्रदान की, दुश्मनों पर सर्जिकल स्ट्राइक करके उन्हें सबक सिखाया। बदले में यहाँ उन्हें चोर तक साबित करने की कोशिश की गई, सर्जीकल स्ट्राइक को भी फर्जी सबित करने की भरपूर कोशिश की गई।

हमारे देश में बहुत से लोग बेहद ही भ्रष्ट, छोटी सोच, अहंँकारी, मतलबी, खुदगर्ज और नमकहराम किस्म के है। 

सावधान रहें नहीं तो एक बार फिर से भारत देश कर्जे की लपेट मे आ जायेगा।  सरदार पटेल, लाल बहादुर शास्त्री, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे ईमानदार और सच्चे देश-भक्तों को ठुकराकर हमने पहले ही भारी भूल की है। अगर इस बार भी हमने वही ग़लती की तो भगवान भी नहीं बचा पायेगा हमारे भारत देश को।

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