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यूपी को जंगलराज से मुक्त कराने वाले योगी को कानून-व्यवस्था का पाठ पढ़ाना क्या सही है?

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किसी भी समाज में स्त्री के प्रति अन्याय, अनादर कभी भी न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है। इसकी कीमत पूरे समाज को उठानी पड़ती है।

लेकिन पिछले 3 वर्ष से जो कमर के नीचे वार करने कि कोशिश हो रही है। यह कायरता ही नहीं, राजनीतिक दरिद्रता भी है। वह लोग जो धर्म को समझतें है, वह भी इस राजनीतिक संघर्ष में एक सन्यासी कि जाति खोजने में जरा भी लज्जित नहीं हुये।

भारतीय जनता पार्टी अब किसी वर्ग विशेष की पार्टी नहीं है। आज के समय में अधिकतर पिछड़ा वर्ग और दलितों का भी एक बड़ा वर्ग इस पार्टी के साथ है। 

यह भी अटल सत्य है कि योगी आदित्यनाथ ने अब तक पूरी तरह भेदभाव रहित शासन किया है। उन्हें निराशा में डूबे एक ऐसे राज्य का भार मिला था जहां अपराध को नैतिक मान्यता मिल चुकी थी।

एक समय लखनऊ में मुलायम सिंह यादव कि सभा में 60 घोड़ो के साथ रैली निकालने वाले पूर्वांचल के बड़े माफ़िया अतीक अहमद के यहाँ आज कुत्ते भी रोटी के टुकड़े के लिये तरस रहें है।

आज़म खान जिन्होंने काशी नरेश तक को अपशब्द कह दिया था। दस साल वह मिनी CM थे। आज वह दर-दर भटक रहे है। 

कुछ ऐसा ही हाल मुख्तार अंसारी का है। कुल 3 हजार करोड़ रुपये की अवैध सम्पत्ति इन लोगों की नष्ट की गई है।

पिछले वर्ष उत्तरप्रदेश में जितने बदमाश मारे गये, वह संख्या कश्मीर में मारे गए आंतकवादियो से भी अधिक है।

CAA के विरोध में जब ऐसा लगा कि पूरा प्रदेश जल जायेगा तब मात्र 24 घँटे के अंदर सबकी कमर तोड़कर, शांति व्यवस्था स्थापित करने वाले मुख्यमंत्री को यदि कोई शासन व्यवस्था का पाठ पढ़ाता है तो वह सबसे बड़ा मूर्ख है।

कोरोनकाल में 25 करोड़ कि जनसंख्या वाले राज्य में, जहाँ 10 लाख से अधिक मजदूर अन्य राज्यों से वापस आ गए। इस दौरान अव्यवस्था फैलाने की कोशिशें भी खूब की गई, राजनीति भी खूब हुई लेकिन दिन रात एक करके किस तरह सबकुछ नियंत्रित किया सीएम योगी ने उसे पूरी दुनिया ने खुद देखा। इस उत्कृष्ट कार्य के लिये तो उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिये था।

लेकिन नहीं, न तर्क है, न तथ्य है, बस एक ही काम है वामी बुद्धजीवी वर्ग का, विरोध करना, गतिरोध और अस्थिरता पैदा करना। साथ में अपनी जातीय चेतना के प्रति सवेंदनशील बुद्धिभृष्ट लोग। 

क्या जाति है इस सन्यासी की? सारे राजनीतिक, सामाजिक विचार में बस यही घूम रहा है। जाति ही वह चक्रव्यूह है एक सन्यासी के लिये, जहां उसे घेरकर खत्म कर दो। और फिर से वही जंगलराज कायम हो जाय। पलायन हो, शरणार्थी बनकर लोग अपने घरों से भाग जाय।

यही चाहते हो न? तो बताओ अगर वह हाथरस कि घटना का न्याय नहीं कर सकते हैं, तो कौन कर सकता है? है कोई? क्या ये उत्तराधिकार में राजनीति में आये पप्पू-गप्पू करेंगे? जिन्होंने इस प्रदेश को अपना आमोद घर समझ रखा है।

हे बुद्धिजीवियों, जातिय चेतना से ग्रसित कुतर्कियो! इस प्रदेश पर दया करो। 27 साल बाद खुली हवा में सांस लेने का सौभाग्य मिला है, उसे नष्ट न करो। 

योगी आदित्यनाथ को कन्या, स्त्री सम्मान करने का पाठ पढ़ाने वालों, उस योगी को उपदेश दोगे जो वर्षो से कन्या पूजन करते रहे हैं?

प्रदेश कि जनता यह महसूस कर रही है कि आज भेदभावरहित शासन व्यवस्था है। यह बात विपक्षियों को स्वीकार नहीं है। क्योंकि उन्होंने तो हमेशा जाति-धर्म का कार्ड खेलकर सत्ता सुख हासिल किया है। 

मुझे पूर्ण विश्वास है कि स्त्रियों का सम्मान करने वाले और समाज के कमजोर वर्ग के लिये लड़ने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे पहले न्याय किये है आगे भी करेंगें। मानवीय भूलो के प्रति हमारी संवेदना रहनी चाहिये। जिससे हम योग्य व्यक्ति को अधिक से अधिक अवसर दे सकें।

अगर आप मेरी इस बात से सहमत हैं तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करके ये जानकारी अन्य लोगों तक भी पहुँचाएं जिससे समाज को भ्रमित होने से बचाया जा सके।

-संजय राजपूत

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