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Bollywood ने भ्रष्ट किया हमारा समाज, दिया अनैतिकता को बढ़ावा, अब करें बहिष्कार

जरा सोचिए कि हम सभी लोग इन कलाकारों पर हर साल कितना धन खर्च करते हैं। सिनेमा के मंहगे टिकटों से लेकर केबल टीवी के बिल तक।

हमारे नादान बच्चे भी अपने जेबखर्च में से पैसे बचाकर इनके पोस्टर खरीदते हैं और इनके प्रायोजित टीवी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए हजारों रुपए के फोन करते हैं।

एक विचारणीय बिन्दू यह भी है कि Bollywood में शादियों का तरीका ऐसा क्यों है कि Shahrukh Khan की पत्नी गौरी छिब्बर एक हिंदू है।


Aamir khan की पत्नियां रीमा दत्ता /किरण राव और Saif Ali Khan की पत्नियाँ अमृता सिंह / करीना कपूर दोनों हिंदू हैं।

इसके पिता नवाब पटौदी ने भी हिंदू लड़की शर्मीला टैगोर से शादी की थी।

Farhan Akhtar की पत्नी अधुना भवानी और फरहान आजमी की पत्नी आयशा टाकिया भी हिंदू हैं।

अमृता अरोड़ा की शादी एक मुस्लिम से हुई है जिसका नाम शकील लदाक है।

Salman Khan के भाई अरबाज खान की पत्नी मलाइका अरोड़ा हिंदू हैं और उसके छोटे भाई सुहैल खान की पत्नी सीमा सचदेव भी हिंदू हैं।

अनेक उदाहरण ऐसे हैं कि हिंदू अभिनेत्रियों को अपनी शादी बचाने के लिए धर्म परिवर्तन भी करना पड़ा है।


Aamir Khan के भतीजे इमरान की हिंदू पत्नी का नाम अवंतिका मलिक है। संजय खान के बेटे जायद खान की पत्नी मलिका पारेख है।

Firoz Khan के बेटे Fardeen की पत्नी नताशा है। Irfan Khan की बीवी का नाम सुतपा सिकदर है। Nasiruddin Shah की हिंदू पत्नी रत्ना पाठक हैं।

एक समय था जब मुसलमान एक्टर हिंदू नाम रख लेते थे क्योंकि उन्हें डर था कि अगर दर्शकों को उनके मुसलमान होने का पता लग गया तो उनकी फिल्म देखने कोई नहीं आएगा।

ऐसे लोगों में सबसे मशहूर नाम Yusuf Khan का है जिन्हें दशकों तक हम Dileep Kumar समझते रहे।

महजबीन अलीबख्श मीना कुमारी बन गई और मुमताज बेगम जहाँ देहलवी मधुबाला बनकर हिंदू ह्रदयों पर राज करतीं रहीं।


बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी को हम जॉनी वाकर समझते रहे और हामिद अली खान विलेन अजित बनकर काम करते रहे।

हममें से कितने लोग जान पाए कि अपने समय की मशहूर अभिनेत्री रीना राय का असली नाम सायरा खान था।

आज के समय का एक सफल कलाकार John Abraham भी दरअसल एक मुस्लिम है जिसका असली नाम फरहान इब्राहिम है।

जरा सोचिए कि पिछले 50 साल में ऐसा क्या हुआ है कि अब ये मुस्लिम कलाकार हिंदू नाम रखने की जरूरत नहीं समझते बल्कि उनका मुस्लिम नाम उनका ब्रांड बन गया है।

यह उनकी मेहनत का परिणाम है या हम लोगों के अंदर से कुछ खत्म हो गया है?

जरा सोचिए कि हम कौनसी फिल्मों को बढ़ावा दे रहे हैं?

क्या वजह है कि बहुसंख्यक बॉलीवुड फिल्मों में हीरो मुस्लिम लड़का और हीरोइन हिन्दू लड़की होती है?

क्योंकि ऐसा फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा फाइनेंसर दाऊद इब्राहिम चाहता है। T-SERIES का मालिक Gulshan Kumar ने उसकी बात नहीं मानी और नतीजा सबने देखा।

आज भी एक फिल्मकार को मुस्लिम हीरो साइन करते ही दुबई से आसान शर्तों पर कर्ज मिल जाता है। इकबाल मिर्ची और अनीस इब्राहिम जैसे आतंकी एजेंट सात सितारा होटलों में खुलेआम मीटिंग करते देखे जा सकते हैं।

सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान, नसीरुद्दीन शाह, फरहान अख्तर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फवाद खान जैसे अनेक नाम हिंदी फिल्मों की सफलता की गारंटी बना दिए गए हैं।

Akshay Kumar, Manoj Kumar और Rakesh Roshan जैसे फिल्मकार इन दरिंदों की आंख के कांटे हैं। तेजी से उभर रहे Sushant Singh Rajput का क्या हश्र किया गया सबके सामने है।

फिल्मों की कहानियां लिखने का काम भी Salim Khan और Javed Akhtar जैसे मुस्लिम लेखकों के इर्द-गिर्द ही रहा. जिनकी कहानियों में एक भला-ईमानदार मुसलमान, एक पाखंडी ब्राह्मण, एक अत्याचारी - बलात्कारी क्षत्रिय, एक कालाबाजारी वैश्य, एक राष्ट्रद्रोही नेता, एक भ्रष्ट पुलिस अफसर और एक गरीब दलित महिला होना अनिवार्य शर्त है।


इन फिल्मों के गीतकार और संगीतकार भी मुस्लिम हों तभी तो एक गाना मौला के नाम का बनेगा और जिसे गाने वाला पाकिस्तान से आना जरूरी है।

हम सबने इन बॉलीवुड के भांडों को सिर आंखों पर बिठाया, अपना आदर्श माना, देवता की तरह पूजा, इन्हें करोड़पति बनाया। और बदले में इन्होंनेे हमारे समाज और हमारी भावी पीढ़ी को क्या दिया? 

बॉलीवुड ने हम सबको सिर्फ गुमराह किया। बार-बार हमारे हिन्दू धर्म को नीचा दिखाने का प्रयास किया। हिन्दू कलाकारों की प्रतिभा को हर तरह से कुचला गया। हमारी युवा पीढ़ी को ड्रग्स, नशे की लत का आदी बनाया। हमारी भावी पीढ़ी को गुमराह और दिग्भ्रमित किया गया। फिल्मों के माध्यम से गलत को सही और सही को गलत साबित करने का प्रयास किया गया। फिल्मों और धारावाहिकों के माध्यम से हमारे भारतीय समाज के संस्कारों और मर्यादा को बुरी तरह चोट पहुंचाई गई। हमारे समाज में नग्नता, हिंसा, अनैतिकता को महिमामण्डित करके हमारे सामाजिक ढांचे को तहस नहस किया गया।

अब समय आ गया है हमारे समाज की सबसे बड़ी गन्दगी बन चुके इस बॉलीवुड नाम के गटर का बहिष्कार करने का। अपनी आने वाली पीढ़ी को बचाना है तो सभी एकजुट होकर अंडरवर्ल्ड की गोद में खेलने वाले अनैतिक बॉलीवुड का पूरी तरह बहिष्कार करें।
                         
     

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