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क्या कृषि विधेयक नोटबन्दी पार्ट-2 है? मोदी ने इस बार इस विधेयक से किसको धोया?

ये जो मोदी हैं न वो बहुत बड़े वाले तीरंदाज हैं। निगाहें कहीं और होती हैं, निशाना कहीं और। पता तब लगता है, जब तीर दिल के पार निकल चुका होता है। ये न खाते हैं न किसी को खाने-पीने के लायक ही छोड़ते हैं। फुल्ली बर्बाद सनम कर डालते हैं।

देखिए विपक्ष छाती पीटता रह गया और कृषि विधेयक लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पास हो गया। 

अब इस विधेयक का खेल देखिये...

यूं समझिए की ये कृषि विधेयक नोटबंदी पार्ट-2 है। जैसे नोटबंदी से ब्लैक मनी का जखीरा दबाये रखने वाले नेस्तनाबूद हो गये थे, वैसे ही इस बिल से पंजाब और महाराष्ट्र के दो दिग्गज बर्बाद हो गये।

पंजाब के सुखबीर सिंह बादल और महाराष्ट्र के शरद पवार के लौए लग गये।

आपको बता दें कि पंजाब वाले सुखबीर सिंह बादल के सुखबीर एग्रो को कम से कम 5000 करोड़ सालाना की आय होती थी। वे एफ.सी.आई. और किसानों के बीच के कमीशन एजेंट थे। उनकी कंपनी को 2.5% कमीशन मिलता था। सारे वेयरहाउस उन्हीं के थे। बगैर सुखबीर एग्रो का ठप्पा लगे कोई किसान एक टन गेहूँ भी एफ.सी.आई. को बेच नहीं सकता था। एक झटके में सब बर्बाद हो गया ।

दूसरे वाले बर्बाद सनम हैं महाराष्ट्र के अर्धजीवित नेता शरद पवार। महाराष्ट्र में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले प्रति वर्ष 10000 करोड़ रुपये का कृषि आय दिखाती थी। पूरे प्याज, मिर्च और अंगूर के व्यापार पर इसी परिवार का कंट्रोल था। इस बिल ने पवार को कहीं का नहीं छोड़ा।


मतलब ये मोदी डालियाँ नहीं काटते, ये तो डायरेक्ट जड़ ही काट देते है।

रिजल्ट स्वरूप अब आशा है कि अकाली दल और एन.सी.पी. को अगले चुनाव में भीख माँगते हुए देखा जाएगा।

सच में मोदी जैसा निर्मोही कश्मीर से कन्याकुमारी तक LED लेकर खोजे से भी नहीं मिलेगा। एकदम फुल्ली बर्बाद सनम करके रख दिए ई तो। 

अब देखते हैं अगला निशाना कौन सनम बनता है?

अब मन करे तो Share भी कर ही दीजिए..

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