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क्या 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन गयी है?

मुझे लगता है अपने देश में जो कुछ चल रहा है उसे देखते हुए 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (Freedom of Expression) किस हद तक होनी चाहिए इसकी समीक्षा किये जाने की आवश्यकता है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की जो परिभाषा है उसके अनुसार...

"किसी सूचना या विचार को बोलकर, लिखकर या किसी अन्य रूप में बिना किसी रोकटोक के अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of expression) कहलाती है। अत: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हमेशा कुछ न कुछ सीमा अवश्य होती है।"

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में आजकल जो देश व समाज विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है उस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी होता जा रहा है। यदि इन देश विरोधी गतिविधियों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो इस देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ सकती है।

इन दिनों चंद राजनीतिक धूर्तबाज जिस तरह से अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए युवाओं और शैक्षणिक संस्थाओं को मोहरा बनाकर अपनी स्वार्थ सिद्धि करने में लगे हैं और जिस तरह से देश में अराजकता का माहौल तैयार किया जा रहा है, इस पर बलपूर्वक रोक लगाया जाना देश की एकता और अखंडता के लिए निहायत जरूरी लगने लगा है।

आज़ादी के मायने देश में अराजकता और गृहयुद्ध की स्थिति पैदा करना तो कत्तई नहीं होना चाहिए। 

क्या कुछ मामलों में आज़ादी से बेहतर गुलामी ही है? 

मुझे तो कुछ संवेदनशील और देशहित के मामलों में तानाशाही और डंडाराज ही सही लगता है। क्योंकि आवश्यकता से अधिक कोई भी चीज जहर ही होती है चाहे वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ही क्यों न हो। और अब ऐसा लगने लगा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता इस देश की एकता और अखंडता के लिए जहर बन चुकी है।

अब ये तो कोई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता  वाली बात नहीं कि देश के लोग देश विरोधी, समाज विरोधी नारे लगाएं, सम्पतियों को नुकसान पहुंचाए, देश में अराजकता और अस्थिरता का माहौल पैदा करें।

इन दिनों जेएनयू में जो कुछ भी चल रहा है और तमाम लोग जिस तरह से उसको अपना समर्थन देने और जायज ठहराने में लगे हैं उससे तो ये साफ जाहिर है कि देश में ऐसे देश विरोधी लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जो इस देश में अराजकता का माहौल तैयार करना चाहते हैं और इस देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं।

मेरे विचार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में चल रही इन देशविरोधी गतिविधियों को बलपूर्वक रोका जाना ही इस देश की एकता और अखंडता के हित में सही कदम होगा।

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